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छत्तीसगढ़ का रायगढ़ जिला अपने ऐतिहासिक, धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है। इन्हीं में से एक प्रमुख आस्था स्थल है नाथलदाई देवी मंदिर, जो रायगढ़ जिले के टीमरलगा गांव में स्थित है। यह मंदिर महानदी और मांड नदी के बीच एक टापूनुमा स्थान पर बसा हुआ है, और चारों ओर से जल से घिरा हुआ होने के कारण इसकी खूबसूरती और भी बढ़ जाती है।
नाथलदाई देवी मंदिर का इतिहास और मान्यता
कहा जाता है कि माता सरस्वती के नथ (नाक का आभूषण) के गिरने से यहां माता का प्रकट होना हुआ और इसलिए इस स्थान का नाम नाथलदाई पड़ा।
• मान्यता है कि नाथलदाई देवी के दर्शन मात्र से मनुष्य के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं।
• इस मंदिर परिसर में एक प्राचीन शिवलिंग भी स्थापित है।
• यहां पर विशेष रूप से नवरात्रि और सावन माह में विशाल मेला लगता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं।
नाथलदाई देवी मंदिर की विशेषता
नाथलदाई मंदिर से जुड़ी एक अद्भुत मान्यता है –
• कहा जाता है कि बरसात के दिनों में जब महानदी और मांड नदी उफान पर होती हैं, तब भी मंदिर बाढ़ में कभी नहीं डूबता।
• बाढ़ का पानी केवल मंदिर की सीढ़ियों तक आकर रुकता है और देवी के चरणों का स्पर्श करने के बाद स्वतः ही जलस्तर कम हो जाता है।
आसपास के प्रमुख स्थल
नाथलदाई देवी मंदिर से मात्र 2.1 किलोमीटर उत्तर-पूर्व दिशा में माता चंद्रहासिनी देवी मंदिर स्थित है। यह मंदिर भी महानदी के तट पर बसा हुआ है और श्रद्धालुओं के लिए आस्था का बड़ा केंद्र माना जाता है।
नाथलदाई देवी मंदिर तक कैसे पहुंचे?
• नजदीकी परिवहन साधन – बस, ट्रेन और हवाई जहाज के माध्यम से रायगढ़ तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।
निष्कर्ष
नाथलदाई देवी मंदिर छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल है, जहां प्रकृति की सुंदरता और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यहां जाकर न केवल मन को शांति मिलती है, बल्कि माता नाथलदाई के दर्शन से भक्तों को आत्मिक शक्ति भी प्राप्त होती है।

