मां चंद्रहासिनी देवी मंदिर छत्तीसगढ़ जहां विराजित है माता सती की 52 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ...

Jayant verma
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मां चंद्रहासिनी देवी मंदिर, रायगढ़ (छत्तीसगढ़)

चंद्रहासिनी देवी मंदिर छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा के डभरा तहसील में स्थित है, यह मंदिर महानदी और मांड नदी के संगम तट पर बसा है, तथा यह एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है, चंद्रहासिनी देवी मंदिर मां सती के 52 शक्तिपीठों में से एक मां चंद्रहासिनी देवी के रूप में विराजित है, माता की मुख चंद्रमा के समान आकृति होने के कारण मां चंद्रहासिनी और चंद्रसेनी के नाम से जाना जाता है, इस मंदिर पर कई श्रद्धालु अपने मनोकामना पूरी करने के लिए यहां बकरे व मुर्गी का बलि देते है, नवरात्रि के अवसर पर लोग अपने मनोकामना पूरा करने के लिए ज्योतिकलश भी जलाते है, यहाँ बने पौराणिक व धार्मिक कथाओं की झाकियां समुद्र मंथन, महाभारत की द्यूत क्रीड़ा आदि, इस पूरे मंदिर परिसर में माता के मंदिर के अलावा कई अन्य देखने योग्य मूर्तियां स्थापित है जिनमें मुख्य है- अर्धनारेश्वर, महाबली हनुमान, कृष्ण लीला, चीर हरण दर्शन, महिषासुर वध, चार धाम, नवग्रह का मूर्ति तथा अन्य देवी देवताओं का मूर्ति भी है, इस मंदिर के दूसरी ओर जमीन के अंदर एक सुरंग बना है। आप यहां घूमने के लिए जा सकते हैं, और माँ चंद्रहासिनी के दर्शन के लिए आने वाले भक्तों का मन मोह लेता है, चंद्रहासिनी मंदिर के समीप एक विशेष नाथलदाई मंदिर है, जो महानदी और मांड के मध्य बीच में स्थित है, चंद्रहासिनी देवी मंदिर  से नाथलदई देवी मंदिर का दूरी 2.1 किलो मीटर है, और यह चंद्रहासिनी देवी मंदिर का दूसरा ओर पश्चिम दिशा में है।


चंद्रहासिनी मंदिर का स्थापना....

चंद्रहासिनी मंदिर का स्थापना पौराणिक मान्यता के अनुसार यह मंदिर भारत में स्थित पवित्र 52 शक्तिपीठों में से एक है।
 माना जाता है कि जब माता सती के पिता दक्ष प्रजापति बृहस्पति सर्व यज्ञ करवा रहे थे तब उन्होंने छोटे बड़े सभी देवी देवताओं को यज्ञ में शामिल होने के लिए बुलाया था।
 
 लेकिन माता सती के पति यानी कि भगवान शिव को उस यज्ञ में नहीं बुलाया गया।
 
जिसके पश्चात नाराज माता सती ने अपने पति भगवान शिव को यज्ञ में ना बुलाने का कारण पूछने अपने पिता दक्ष प्रजापति के पास गई।

 माता ने पूछा तो दक्ष प्रजापति ने भगवान शिव की घोर निंदा की और इस निंदा को माता सती नहीं सुन पाई और जलते हुए यज्ञ में अपने प्राणों की आहुति दे दी।

जब भगवान शिव को इसका पता चला तो वे उस यज्ञ स्थल पर आए और माता सती के जले हुए शरीर को अपने कंधों में उठाकर तांडव करने लगे।

 भगवान शिव को क्रोधित अवस्था में तांडव करते देख सभी देवगण भयभीत हो गए और इंद्र देव ने इस पूरे पृथ्वी को बचाने के लिए माता सती के शरीर को अपने चक्र से काट दिया।

जिसके पश्चात माता सती का शरीर चक्र से कटने के पश्चात 52 जगह में गिरा और इसी घटना के पश्चात माता सती पर आधारित 52 शक्तिपीठ बनाए गए।

 उन्हीं में से एक शक्तिपीठ यह भी है। माना जाता है कि माता सती के 52 वाँ शक्तिपीठ नैना देवी है।


मेला

चंद्रहासिनी मंदिर के पावन स्थल पर नवरात्र के पावन पर्व में नवरात्रि और चैत नवरात्र में छ्ट को भव्य मेला लगता है, जिसे देखने और माता चंद्रहासिनी और नाथलदाई के दर्शन करने यहां दूर दूर से यात्री आते है, मेलें के शुभ अवसर पर यहां भक्तों का भीड़ और लम्बी कतारें लगा रहता है। 


डभरा मुख्यालय से मंदिर का दूरी...

चंद्रहासिनी माता की मंदिर तहसील डभरा मुख्यालय से 21 किलो मीटर दूर पूर्व दिशा में स्थित है, तथा डभरा से मंदिर तक वाहन या बस से पहुंचने में 42 मिनट का समय लगता है।


चंद्रहासिनी देवी मंदिर तक कैसे पहुंचे....

माता चंद्रहासिनी देवी मंदिर तक बस,ट्रेन और फ्लाइट के माध्यम से पहुंच सकते है,

बस - से सड़क मार्ग तहसील डभरा होते हुए असानी से चंद्रहासिनी पहुंच सकते है, मुख्यालय डभरा से चंद्रहासिनी मंदिर 21 किलो मीटर दूर पूर्व दिशा में स्थित है,

ट्रेन - से यहां के नजदीक रेलवे स्टेशन जांजगीर नैला और चांपा है, यहां पर टैक्सी,बस,रिक्शा उपलब्ध है, जिसके माध्यम से मंदिर पहुंच सकते है, रेलवे स्टेशन से मंदिर का दूरी नैला स्टेशन से 100 और चांपा स्टेशन से 89 किलो मीटर दूरी पर है।

फ्लाइट - के द्वारा यहां से नजदीक राजधानी रायपुर एयरपोर्ट पड़ता है, रायपुर से चंद्रहासिनी मंदिर का दूरी 218 किलोमीटर है, रायपुर से बस,टैक्सी, या ट्रेन के माध्यम से पहुंच सकते है।


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