धरती की परतें – सतह से केंद्र तक पूरी जानकारी (General Knowledge)

Jayant verma
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धरती की परतें – भू-पर्पटी, मैंटल, बाहरी कोर और आंतरिक कोर की संरचना, डायमीटर और धातुएं


पृथ्वी (Earth) हमारे सौरमंडल का एकमात्र ग्रह है जिस पर जीवन संभव है। इसकी संरचना बहुत जटिल है और यह कई परतों से बनी हुई है। सतह से लेकर केंद्र तक पृथ्वी को मुख्य रूप से चार परतों में बाँटा गया है – भू-पर्पटी (Crust), मैंटल (Mantle), बाहरी कोर (Outer Core), और आंतरिक कोर (Inner Core)


इन परतों को समझने से हमें भूगर्भीय घटनाओं (Geological Activities) जैसे – भूकंप, ज्वालामुखी, पर्वत निर्माण, और चुंबकीय क्षेत्र की जानकारी मिलती है।


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पृथ्वी की परतें (Earth Layers)


1. भू-पर्पटी (Crust) – धरती की ऊपरी सतह


•  यह पृथ्वी की सबसे ऊपरी और पतली परत है।


•  औसत मोटाई: महाद्वीपीय पर्पटी (Continental Crust) – 35 से 70 किमी और महासागरीय पर्पटी (Oceanic Crust) – 5 से 10 किमी।


•  इसमें ग्रेनाइट, बेसाल्ट और चूना पत्थर जैसी चट्टानें पाई जाती हैं।


•  इसी पर सभी जीव-जंतु, पेड़-पौधे और मानव जीवन संभव है।


•  पर्पटी को अलग-अलग टेक्टोनिक प्लेटों (Tectonic Plates) में बाँटा गया है, जो धीरे-धीरे हिलती रहती हैं और भूकंप तथा ज्वालामुखी का कारण बनती हैं।


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2. मैंटल (Mantle) – मध्य परत


•  यह पर्पटी के नीचे स्थित है और पृथ्वी का लगभग 84% भाग इसी से बना है।


•  गहराई: 70 किमी से 2,900 किमी तक।


•  इसमें मैग्मा (पिघली हुई चट्टानें) पाई जाती हैं।


•  मैंटल को दो भागों में बाँटा गया है:


•  ऊपरी मैंटल (Upper Mantle): 70–700 किमी गहराई तक।


•  निचला मैंटल (Lower Mantle): 700–2900 किमी गहराई तक।


•  मैंटल में होने वाली संवहन धारा (Convection Current) के कारण टेक्टोनिक प्लेटें हिलती हैं और ज्वालामुखी तथा भूकंप आते हैं।


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3. बाहरी कोर (Outer Core)


•  गहराई: 2,900 किमी से 5,100 किमी तक।


•  यह तरल अवस्था में है।


•  मुख्य तत्व: लोहा (Iron) और निकेल (Nickel)


•  बाहरी कोर के बहाव के कारण ही पृथ्वी पर चुंबकीय क्षेत्र (Earth’s Magnetic Field) उत्पन्न होता है, जो हमें हानिकारक सूर्य की किरणों से बचाता है।


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4. आंतरिक कोर (Inner Core)


•  यह पृथ्वी का सबसे भीतरी और केंद्र का हिस्सा है।


•  गहराई: 5,100 किमी से 6,371 किमी (केंद्र तक)


•  अत्यधिक दबाव के कारण यह ठोस है, जबकि तापमान बहुत अधिक होता है (लगभग 6,000°C, सूर्य की सतह जितना गर्म)।


•  इसमें मुख्य रूप से लोहा और निकेल पाए जाते हैं।


•  इसे पृथ्वी का ‘हृदय (Heart of the Earth)’ भी कहा जाता है।


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📊 पृथ्वी की परतों का सारांश (Table Form)


परत गहराई अवस्था मुख्य तत्व विशेषता


भू-पर्पटी (Crust) 0–70 किमी ठोस ग्रेनाइट, बेसाल्ट जीवन इसी परत पर संभव

मैंटल (Mantle) 70–2900 किमी ठोस + गाढ़ा मैग्मा भूकंप, ज्वालामुखी यहीं से

बाहरी कोर (Outer Core) 2900–5100 किमी तरल लोहा, निकेल चुंबकीय क्षेत्र का निर्माण

आंतरिक कोर (Inner Core) 5100–6371 किमी ठोस लोहा, निकेल सबसे गर्म और घना हिस्सा


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🌋 पृथ्वी की परतों से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य (GK Points)


1. पृथ्वी की सबसे मोटी परत – मैंटल (Mantle)


2. पृथ्वी की सबसे पतली परत – भू-पर्पटी (Crust)


3. पृथ्वी की सबसे गर्म परत – आंतरिक कोर (Inner Core)


4. चुंबकीय क्षेत्र किसके कारण बनता है? – बाहरी कोर


5. ज्वालामुखी का लावा कहाँ से आता है? – मैंटल से


6. पृथ्वी का व्यास (Diameter) – 12,742 किमी


7. पृथ्वी का औसत तापमान केंद्र पर – 6,000°C


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❓ FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न


Q1. पृथ्वी की कुल कितनी परतें होती हैं?

👉 चार – भू-पर्पटी, मैंटल, बाहरी कोर और आंतरिक कोर।


Q2. सबसे पतली परत कौन-सी है?

👉 भू-पर्पटी (Crust)।


Q3. पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र किस परत से बनता है?

👉 बाहरी कोर (Outer Core)।


Q4. ज्वालामुखी का लावा किस परत से आता है?

👉 मैंटल (Mantle) से।


Q5. आंतरिक कोर ठोस क्यों है?

👉 अत्यधिक दबाव के कारण।


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निष्कर्ष (Conclusion)


पृथ्वी की संरचना को समझना न केवल भूगोल (Geography) में महत्वपूर्ण है बल्कि विज्ञान और सामान्य ज्ञान (General Knowledge) के लिए भी बहुत जरूरी है। ऊपरी परत पर जीवन संभव है जबकि नीचे की परतें हमें प्राकृतिक घटनाओं और पृथ्वी की शक्ति के बारे में बताती हैं।

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