22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर की खूबसूरत बैसरन घाटी में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब एक आतंकवादी हमले में 26 हिंदू पर्यटकों की निर्मम हत्या कर दी गई। इस बर्बर हमले ने न सिर्फ देश को झकझोर दिया, बल्कि भारत-पाक रिश्तों को भी बेहद संवेदनशील मोड़ पर ला खड़ा किया है।
हमले की भयावह तस्वीर
इस आतंकवादी हमले को 'कश्मीर रेजिस्टेंस' नामक एक नए संगठन ने अंजाम दिया, जिसने विशेष रूप से हिंदू पर्यटकों को निशाना बनाया। बताया जा रहा है कि हमलावरों ने धार्मिक पहचान पूछकर ही लोगों की हत्या की। इस घटना के दौरान ज़िपलाइनिंग कर रहे एक पर्यटक ऋषि भट्ट ने अनजाने में इस घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, जिसमें गोलियों की आवाज़ें और चीख-पुकार साफ सुनाई देती हैं।
ऋषि भट्ट द्वारा रिकॉर्ड की गई वीडियो फुटेज देखें (YouTube)
मास्टरमाइंड कौन?
भारतीय खुफिया एजेंसियों ने इस हमले के पीछे पाकिस्तान के पूर्व SSG कमांडो हाशिम मूसा का नाम लिया है, जो अब लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम कर रहा है। यह नाम सुनते ही पुलवामा और उरी जैसे दर्दनाक हमलों की याद ताजा हो जाती है।
भारत की कड़ी प्रतिक्रिया
भारत सरकार ने इस हमले को लेकर सख्त रुख अपनाया है:
• सिंधु जल संधि निलंबित
• पाकिस्तानी नागरिकों को देश छोड़ने का आदेश (मेडिकल वीज़ा धारकों को छोड़कर)
• पाकिस्तानी राजनयिकों की संख्या कम की गई
• सोशल मीडिया पर पाकिस्तान से जुड़े कई खातों पर बैन
प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में हुई हाई-लेवल मीटिंग में सेना को आतंक के खिलाफ खुली छूट दी गई है। इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर के 50 से अधिक पर्यटन स्थलों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है।
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
पाकिस्तान ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए एक स्वतंत्र जांच की मांग की है। हालांकि, एलओसी पर संघर्षविराम उल्लंघन और गोलीबारी की घटनाएं यह बताने के लिए काफी हैं कि हालात बेहद नाजुक हैं।
निष्कर्ष
पहलगाम अटैक ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, लेकिन उसके निशाने पर अक्सर निर्दोष ही होते हैं। इस दर्दनाक घटना से उपजा गुस्सा और शोक पूरे देश में महसूस किया जा रहा है। अब समय आ गया है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस मुद्दे को गंभीरता से ले और ठोस कार्रवाई करे।
अगर आपको ये पोस्ट जानकारीपूर्ण लगी हो तो इसे शेयर करें और अपनी राय नीचे कमेंट में ज़रूर दें।

